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गजब: आयरलैंड के बाद इस देश में भी सर्वाधिक तेजी से बढ़ रहा हिंदू धर्म

नई दिल्ली। हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है जो कई वर्षों से चला रहा है। अपनी उदारता, व्यापकता और सहिष्णुता की वजह से हिंदू धर्म की तरफ पूरी दुनिया के लोगों को ध्यान खिंच रहा है। ऑस्ट्रेलिया और आयरलैंड जैसे देश में तो सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म बन गया है।

ऑस्ट्रेलिया में 2011 की जनगणना के अनुसार हिंदू धर्म सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है। 2011 की जनगणना में हिंदू धर्म सर्वाधिक तेजी से फैलने वाला धर्म पाया गया था। 2016 की जनगणना में 2.7 फीसद हिंदू आबादी का अनुमान है। जबकि वहां इस्लाम मानने वाली आबादी 2.6 फीसद है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में आधुनिकता की दौड़, भागमभाग, तनाव में लिपटी जीवनचर्या को हिंदू धर्म में ही सुकून मिल रहा है।

वेबसाइट एसबीएस की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में इस्लाम की तरफ आकर्षित होने वालों की संख्या वहां की कुल आबादी की 2.2 फीसदी से लेकर 2.6 फीसदी के करीब बताई जाती है, वहीं हिंदू धर्म की ओर आकर्षित होने वालों की संख्या इससे ज्यादा 2.7 फीसदी है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े धर्म के प्रति ऑस्ट्रेलियाई लोगों में आस्था बढ़ रही है। हिन्दू धर्म अपनाने वाले वाले एक ऑस्ट्रेलियाई के अनुसार हिंदू धर्म में जीवन जीने का तरीका, शाकाहार, कर्म, आध्यात्मिकता ऐसे तत्व हैं जो और कहीं नहीं हैं।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न जैसे बड़े शहर में रथयात्रा और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के मौकों पर मंदिरों में और अन्य आयोजनों में उमड़ती हजारों लोगों की भीड़ से हिंदुत्व के प्रति ऑस्ट्रेलियाई लोगों की आस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मेलबर्न में इस्कॉन मंदिर के अलावा भी कई मंदिर हैं जो आस्था का केंद्र बने हुए हैं। एक आंकड़े के मुताबिक पूरे ऑस्ट्रेलिया में भगवान गणेश, श्रीकृष्ण, माता दुर्गा, हनुमान जी और सांई बाबा के 51 हिंदू मंदिर हैं। इनमें से 19 मंदिर विक्टोरिया में हैं। मेलबर्न के कैरम डाउन इलाके में शिव-विष्णु मंदिर ऑस्ट्रेलिया का सबसे पुराना और बड़ा मंदिर है। इसकी बुनियाद 1988 में रखी गई थी। ये मंदिर करीब 6 एकड़ में फैला है और यहां हर साल लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर सिर्फ भारतीय और ऑस्ट्रेलिया के ही नहीं दुनिया भर से, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण शुरू होने के वक्त से ही यहां जुड़ी श्रीलंका की शिवनंदिनी कृष्णमूर्ति कहती हैं कि हमें पूजा के लिए एक जगह चाहिए थी और एक छोटे से शेड से बढ़ कर ये भव्य मंदिर बन गया।

मेलबर्न के इस मंदिर में हिंदू धर्म को मानने वालों के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी पहुंचते हैं और वैदिक हिंदू रीति-रिवाजों से परिचित होते हैं। ऑस्ट्रेलिया के सभी मंदिरों की देखरेख Hindu Organisation and Temples & Association करता है। ये संगठन हिंदुओं की आस्था से जुड़े तमाम क्रियाकलापों को भी कराता है। इन मंदिरों में शादी, नामकरण संस्कार और पूजा-अर्चना के अलावा होली-दीवाली जैसे मौकों पर खास आयोजन भी किए जाते हैं। लोग बच्चे के जन्म, नए घर में प्रवेश या कार खरीदने पर भी यहां पूजा के लिए आते हैं। हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया भी यहां हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा, सरकार से तालमेल और मीडिया में उनके सही प्रतिनिधित्व के लिए काम करती है। हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने 2016 की जनगणना में हिंदू धर्म को भी धर्म बताने के विकल्प में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। काउंसिल के एक सदस्य भागवत कहते हैं कि वो 2016 की जनगणना के आंकड़ों को जानने के लिए बहुत उत्सुक हैं और संभवत: इस बार भी हिंदुओं की संख्या बढ़ कर ही आएगी।
 
आपको बता दे कि आयरलैंड में भी हिन्दू धर्म का तेजी से विकास हो रहा है। आयरलैंड की जनगणना के अनुसार पिछले 5 सालों में हिन्दुओं की आबादी में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह जनगणना आज से एक साल पहले 2016 के अप्रैल महीने में की गयी थी। इसी समय मुस्लिम जनसंख्या में 29 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है।

आयरलैंड की कुल जनसंख्या में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आयरलैंड मुख्य रूप से इसाई धर्म का पालन करने वाला देश है। यहां की कुल आबादी 4.76 मिलियन है, जिसमें से 3.73 मिलियन आबादी रोमन कैथलिक है। आंकड़े देखने के बाद यह पता चलता है कि इस देश में 2011 में हिन्दुओं की संख्या कुल 10,000 थी, जो अप्रैल 2016 में बढ़कर 14,000 हो गयी। जबकि आयरलैंड में मुस्लिम हिन्दुओं के मुकाबले 6 गुना ज्यादा संख्या में रहते हैं।

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