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बीजेपी लायी जबरदस्त क़ानून, राष्ट्रपति कोविंद ने भी दी मंजूरी, कांग्रेस समेत सभी भ्रष्टाचारियों के उड़े होश

नई दिल्ली : मोदी सरकार आने के बाद देश को उम्मीद हुई कि अब बदलाव की बयार आएगी, विकास होगा और अपराधियों को सजा होगी. जिस तरह लालू यादव और उनका परिवार, पी चिदंबरम और उनका बेटा जांच एजेंसियों के शिकंजे में फंस रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि मोदी सरकार अपने वायदे पर खरी उतर भी रही है. मगर अब झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक ऐसा हाहाकारी फैसला ले लिया है, जिसका पूरा देश दशकों से इन्तजार कर रहा था.

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भ्रष्टाचारियों और अपराधियों की संपत्ति होगी जब्त
कांग्रेस राज में तो नेता ही खुलेआम घोटाले करते थे, उनकी देखा-देखी कई सरकारी अफसरों, बाबुओं का मनोबल भी इतना बढ़ गया था कि खुलकर रिश्वतखोरी और दलाली की जाती थी. कई अधिकारी तो अब तक पकडे भी जा चुके हैं, जिनके पास से करोड़ों-अरबों की संपत्ति भी बरामद हुई है.

राष्ट्रपति से मिली मंजूरी
ऐसे ही भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ एक्शन लेते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि उनके राज्य में ना केवल भ्रष्टाचारियों और अपराधियों को सजा दी जायेगी बल्कि उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली जायेगी. इसके लिए राज्य सरकार विशेष क़ानून लायी है, जिसे राष्ट्रपति कोविंद से मंजूरी भी मिल गयी है.

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अब तक राज्य में भ्रष्टाचारियों और अपराधियों को सजा तो मिलती थी, कुछ थोड़ा-बहुत जुर्माना भी लगा दिया जाता था. कुछ वक़्त में जमानत पर बाहर आकर भ्रष्टाचार से कमाई गयी अकूत दौलत से अपराधी और उनके परिवार वाले ऐश करते थे. मगर अब वक़्त बदल गया है. अब ऐसे सभी भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त की जाएगी.

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में पनपने नहीं दिया जाएगा और जो दोषी हैं उनको सजा जरूर मिलेगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास के मुताबिक सरकार ने ऐसे अपराधियों और भ्रष्टाचारियों की लिस्ट बना ली है, जिन पर कार्रवाई की जायेगी.

विशेष कानून बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने 16 मार्च 2015 को विधानसभा के बजट सत्र में भ्रष्ट अधिकारियों, अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए विशेष कानून बनाने की घोषणा की थी. इस मामले में निगरानी ब्यूरो, जो अब एसीबी यानी एंटी करप्शन ब्यूरो है. इस जांच विभाग ने अप्रैल 2015 में नियमावली का प्रारूप तैयार किया था. विधि विभाग की सहमति के बाद कैबिनेट ने इसे दो जून 2015 को पास किया था. इसके बाद सरकार ने इसे राज्यपाल के पास भेजा और अध्यादेश के सहारे इसे जल्द लागू करने की इच्छा जताई.

गवर्नर ने दिए थे कुछ संसोधन के सुझाव
हालांकि उस दौरान राज्यपाल ने नियमावली में कुछ संशोधन के सुझाव दिए और इस पर राष्ट्रपति की सहमति लेने को बाध्यकारी करार दिया था. आवश्यक संशोधन के बाद राष्ट्रपति ने अगस्त 2015 में इस पर सहमति दी. इसके बाद सरकार ने अध्यादेश का प्रारूप तैयार कर राज्यपाल की सहमति ली. सरकार ने 28 जनवरी 2016 को अध्यादेश के सहारे इस कानून को लागू किया. अध्यादेश की अवधि समाप्त होने के बाद इसे विधेयक के रूप में पारित करा राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा गया था, जिस पर मंजूरी मिल गई है.

बताया जा रहा है कि झारखंड की देखा-देखी अब जल्द ही ऐसे क़ानून अन्य राज्यों में भी आएंगे. जिसके बाद लालू, चिदंबरम सरीखे सभी नेताओं तक की संपत्ति जब्त कर ली जायेगी. रिश्वतखोर अधिकारियों और दलाली करने वाले अफसरों की संपत्ति भी इसी तरह से जब्त कर ली जायेगी. इसे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है.

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